चितई के कामना पूर्ति मंदिर के गोलू देवता की कहानी (CHITAI GOLU DEV STORY- in Hindi & English)

गोलू देवता की कहानी

आप, हम और हम जैसे कई और लोग हैं जिनको Almora के निकट स्थित गोलू देवता के मंदिर मे समय व्यतीत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है.
हमारे पहाड़ मे इस मंदिर और गोलू देवता के लिए काफ़ी आस्था है. इस कामना पूर्ति मंदिर मे आकर सिर्फ़ पहाड़ी लोगों को ही नही अपितु देश विदेश के लोगों को उनका मनचाहा वरदान मिला है. और शायद यही वजह है की इसकी प्रसिद्धि रोज़ बढ़ती ही जा रही है.
आप और हम जानते ही है की गोलू देवता को न्याय का देवता कहा जाता है. पर क्या आप जानते हैं की ऐसा क्यों है ?
आज हम आप सभी के लिए गोलू देवता की यही दिलचस्प कहानी लेके आए हैं:

कहा जाता है की कत्युरि वंश के राजा झल राय की सात रानियाँ थी. सातों रानियों मे से किसी की भी संतान नही थी. राजा इस बात से काफ़ी परेशान रहा करते थे. एक दिन वे जंगल मे शिकार करने के लिए गये हुए थे जहाँ उनकी मुलाक़ात रानी कलिंका से हुई(रानी कलिंका को देवी का एक अंश माना जाता है). राजा झल राय, रानी को देखकर मंत्रमुग्ध हो गये और उन्होने उनसे शादी कर ली.




कुछ समय बाद रानी गर्भवती हो गयीं. यह देख सातों रानियों को ईर्ष्या होने लगी. सभी रानियों ने दाई माँ के साथ मिलकर एक साजिश रची. जब रानी कलिंका ने बच्चे को जन्म दिया, तब उन्होंने बच्चे को हटा कर उसकी जगह एक सिल बट्‍टे का प्त्थर रख दिया. बच्चे को उन्होने एक टोकरे मे रख कर नदी मे बहा दिया.
वह बच्चा बहता हुआ मछुआरो के पास आ गया. उन्होंने उसे पाल पोसकर बड़ा किया. जब बालक आठ वर्ष का हुआ तो उसने उसने पिता से राजधानी चंपावत जाने की ज़िद की. पिता के यह पूछने पर की वह चंपावत कैसे जाएगा बालक ने कहा की आप मुझे बस एक घोड़ा दे दीजिए. पिता ने इसे मज़ाक समझकर उसे एक लकड़ी का घोड़ा लाकर दे दिया.
लेकिन बालक तो साक्षात भगवान ही थे. वो उसी घोड़े को लेकर चंपावत आ गये. वहाँ एक तालाब मे राजा की सात रानियाँ स्नान कर रही थी. बालक वहाँ अपने घोड़े को पानी पिलाने लगा. यह देख सारी रानियाँ उसपर हस्ने लगीं और बोलीं- “मूर्ख बालक लकड़ी का घोड़ा भी कभी पानी पीता है?”. बालक ने तुरंत जवाब दिया की अगर रानी कलिंका एक पत्थर को जन्म दे सकतीं हैं तो क्या लकड़ी का घोड़ा पानी नही पी सकता… यह सुन सारी रानियाँ स्तब्ध रह गयीं. शीघ्र ही यह खबर पूरे राज्य में फैल गयी… राजा की खुशियाँ लौट आईं. उन्होने सातों रानियों को दंड दिया और नन्हे गोलू को राजा घोषित कर दिया.
तब से ही कुमायूँ मे उन्हे न्याय का देवता माना जाने लगा. धीरे धीरे उनके न्याय की ख़बरे सब जगह फैलने लगी. उनके जाने के बाद भी, जब भी किसी के साथ कोई अन्याय होता तो वह एक चिट्ठी लिखके उनके मंदिर मे टाँग देता और शीघ्र ही उन्हे न्याय मिल जाता. इसी लिए सिर्फ़ कुमायूँ मे ही नही बल्कि पूरे विश्व मे उन्हे कामना पूर्ति भी माना जाता है… 😀

 

ENGLISH TRANSLATION:

You, we and many more people like us have been fortunate enough to have the privilege of spending time in the CHITAI temple of God Golu located near Almora.
People of our region have a lot of faith in God Golu. The wish fulfillment temple isn’t only famous with the hill people but it is also highly regarded abroad as well. People from around the world have got what they always desired by just visiting this temple (such are its magical powers). And perhaps that is why its popularity is growing daily.
You might already know that God Golu is called the god of justice. But do you know why?
We have brought his story for you …read on:

Katyuri dynasty king called Jhal Rai had seven queens but none of them was able to conceive a heir to the his throne. This very fact kept the king disturbed. One day when he had gone to hunt in the woods, he met the queen Kalinka (Queen Kalinka is considered a part of the Divine). King Jhal Rai was mesmerised by her beauty and her married her soon after.
After a while, the queen became pregnant. The other seven queens began to envy her. All queens conspired together with the midwife. When the child was born, the midwife replaced the child with piece of stone. She put the baby in a basket which the river washed away.
The child was found by some fishermen who nurtured him. When the child was eight years old, he asked his father that he wanted to visit the capital, Champawat. When the father asked him how he would reach Champawat, the child replied “you just give me a horse”. The father took it as a joke and brought him a wooden horse.
But the boy was God himself. He took the horse and arrived at Champawat. There was a pond in Champawat where the king’s seven queens were taking bath. The boy started watering his horse there. All the queens saw him and started laughing – “silly boy….Does a wooden horse ever drink water?”. To this the child replied “If queen Klinka can give birth to a stone, why can’t a wooden horse drink water !! They all were stunned to hear that. Soon the news spread across the state … and the King’s happiness returned. He punished the seven queens and declared little Golu the king of the state.
From then on Golu Dev came to be known as the god of justice. Slowly word about his righteousness started spreading everywhere. Even after his death, whenever there was any injustice to anyone, he’d write a letter and hang it in the temple. And justice was delivered to them by the almighty . That is the reason why this temple is considered a wish fulfillment temple.

 

There are three temples of Golu Dev, 2 at Almora and The main one at Champawat (Uttarakhand)

 

10 Comments

  1. Jai ho golu devta bhgwan hamare saath niyya karna insaaf dilana bhagwan ham aapke he chatra chaya me hai parbhu parbhu sachai ki jeet karna parbhu

  2. Jai ho golu Devta ki
    Devta Maharaj kirpya meri madad kro

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